Ehsaas Alfazo me
चांद
चांद

चांद

चांद या दिल का सुकून क्या कह कर बुलाऊं तुझे
क्या लगता है तू मेरा कैसे बताऊं तुझे
तू खुद ही देख ले , तू जानता तो है कि कैसा रिश्ता हमारा है
कुछ तो है तो जो मेरे पास है लेकिन ,वो तरफदारी ऐसे करता है जैसे की वोह तुम्हारा है

Leave a Reply